मुझे नहीं लगता कि बागी विधायक ऐसा करेंगे, क्योंकि बगावत का उद्देश्य ही सत्ता परिवर्तन है।

फैजान- मुझे नहीं लगता कि बागी विधायक ऐसा करेंगे, क्योंकि बगावत का उद्देश्य ही सत्ता परिवर्तन है। यदि फिर भी ऐसी स्थिति बनती है तो राज्यपाल सरकार को एक निश्चित समय तक फ्लोर टेस्ट कराने को कह सकते हैं, उसके बाद सरकार या स्पीकर जानबूझकर फ्लोर टेस्ट नहीं कराते तो प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का कारण बताकर राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।
प्रश्न: यदि स्पीकर इस्तीफों पर कोई फैसला ले लेते हैं तब?
फैजान - स्पीकर के फैसले से विधानसभा के अंदर संख्याबल की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद भाजपा राज्यपाल से फ्लोर टेस्ट कराने की मांग कर सकती है। राज्यपाल भी स्वत: संज्ञान से प्लोर टेस्ट कराने का आदेश दे सकता है।
प्रश्न: राज्यपाल ने सीएम को पत्र लिखकर कुछ शर्तों के साथ फ्लोर टेस्ट कराने के निर्देश दिए हैं, और वक्त भी तय कर दिया है? 
फैजान - विधानसभा संचालन की आंतरिक व्यवस्था का क्षेत्राधिकार स्पीकर का ही है। इस मामले में कानून एकदम स्पष्ट है। लेकिन जहां तक राज्यपाल की बात है, तो संविधान का अनुच्छेद 174 कहता है कि राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने और फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दे सकते हैं। अनुच्छेद 175 कहता है कि राज्यपाल विधानसभा को कोई संदेश या सूचना भेज सकता है, जिस पर स्पीकर को सुविधानुसार जल्द विचार करना होगा। लेकिन सदन के अंदर की आंतरिक प्रक्रिया में राज्यपाल की भूमिका को लेकर कानून खामोश है। ऐसी स्थिति में यही बेहतर होगा कि कोई एक पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रिट लेकर जाए, और दिशा-निर्देश प्राप्त कर ले।