" alt="" aria-hidden="true" /> भोपाल. मध्य प्रदेश में लगभग एक हफ्ते से जारी सत्ता संघर्ष में बात राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों के टकराव तक पहुंच गई है। इस टकराव से कई उलझे हुए सवाल भी खड़े हो गए हैं। इन्हीं सवालों और संभावनाओं के बारे में भास्कर ने संवैधानिक कानूनों के जानकार फैजान मुस्तफा से विस्तार से बात की। उनका कहना है कि यदि टकराव बढ़ता है तो फैसला या तो सुप्रीम काेर्ट करेगा या फिर राष्ट्रपति शासन की संभावना बन सकती है।
प्रश्न: क्या स्पीकर फ्लोर टेस्ट कराने के राज्यपाल के आदेश को मानने के लिए बाध्य है?
फैजान- बिल्कुल बाध्य होंगे। राज्यपाल राज्य की विधानसभा का उसी तरह प्रमुख अंग है, जिस तरह राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा तीनों मिलकर संसद का अंग हैं और प्रमुख भी हैं। हालांकि सदन के भीतर फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया और कार्यवाही कैसे होगी, यह स्पीकर का क्षेत्राधिकार है।
प्रश्न: विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों की सीमा कहां तक है?
फैजान- एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत किसी विधायक के इस्तीफा देने, पाला बदलने या अवैधानिक कृत्य पर उसकी सदस्यता पर निर्णय की एब्सोल्यूट पाॅवर विधानसभा अध्यक्ष को ही है। स्पीकर के पास दो विकल्प हैं- या तो वह विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर ले या उन्हें डिसक्वालीफाई (अयोग्य) कर दे। स्पीकर कोई न कोई बहाना या कारण बताकर अपने निर्णय को सिर्फ डिले कर सकता है, ताकि सत्ताधारी पार्टी के लोगों को बागियों को मनाने का कुछ वक्त मिल जाए। लेकिन दो विकल्पों के अलावा स्पीकर के पास कोई और चारा नहीं है।
प्रश्न: स्पीकर ने कहा है कि जब तक विधायक सामने नहीं आते, वे इस्तीफा मंजूर नहीं करेंगे। लेकिन मंत्री पद पर बने 6 विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं, लेकिन यदि शेष 16 बागी विधायक कई दिनों तक सामने नहीं आते हैं तो क्या होगा?
मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट पर सरगर्मी: राज्यपाल का आदेश मानने के लिए बाध्य, लेकिन सदन में स्पीकर की ही चलेगी
मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट पर सरगर्मी: राज्यपाल का आदेश मानने के लिए बाध्य, लेकिन सदन में स्पीकर की ही चलेगी